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कहाँ चले भैया / रमेश तैलंग
Kavita Kosh से
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सड़कों पर वाहन
फुटपाथ पर दुकानें
पैदल चलने वाले कहाँ चले भैया ?
बड़े-बड़े शहरों की
हालत तो देखो
धकियाने वालों की
आदत तो देखो
गिर-पड़ जाएँ तो फिर न सँभलें भैया ।
रिक्शों से सटे हुए
रिक्शे बाज़ार में
जाना आसान नहीं
रहा सड़क पार में,
अड़ियल टटू हैं सब, नहीं टलें भैया ।
कल भी स्कूल में
’लेट’ पहुँचना पड़ा,
सज़ा मिली टीचर से
मुर्गा बनना पड़ा
इससे अच्छा, घर से न निकलें भैया ।