भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

किसी को कुछ न बताओ किसी से कुछ न कहो / शीन काफ़ निज़ाम

Kavita Kosh से
अनिल जनविजय (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 13:39, 22 अगस्त 2009 का अवतरण

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

किसी को कुछ न बताओ किसी से कुछ न कहो
सभी से ख़ुद को छुपाओ किसी से कुछ न कहो

घरों में लुट के सफ़र में रहो लुटेरों से
हक़ीक़तों को छुपाओ किसी से कुछ न कहो

सभी की सब से अदावत है और मुहब्बत भी
सभी से हाथ मिलाओ किसी से कुछ न कहो

हरेक हाथ में ख़ंजर है तुम को क्या मतलब
तुम अपनी ख़ैर मनाओ किसी से कुछ न कहो