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खटिया छोड़ें भोर में / त्रिलोक सिंह ठकुरेला

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खटिया छोड़ें भोर में, पीवें ठण्डा नीर।
मनुआ खुशियों से भरे, रहे निरोग शरीर॥
रहे निरोग शरीर, वैद्य घर कभी न आये।
यदि कर लें व्यायाम, वज्र सा तन बन जाये।
'ठकुरेला' कविराय, भली है सुख की टटिया।
जल्दी सोये नित्य, शीघ्र ही छोड़ें खटिया