भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

ख़ुदा / हैरॉल्ड पिंटर

Kavita Kosh से
अनिल जनविजय (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 19:51, 8 जनवरी 2009 का अवतरण (नया पृष्ठ: {{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=हैरॉल्ड पिंटर |संग्रह= }} <Poem> ख़ुदा ने अपने ख़ुफ़...)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

ख़ुदा ने अपने ख़ुफ़िया दिल में आह्वान किया
एक शब्द ढूंढने के लिए
नीचे इकठ्ठे जमाव को देने के लिए आशीष।

लेकिन उसने ढूंढा और चाहे जितना ढूंढा
और प्रेतों से फिर जी उठने की मिन्नत की
पर गीत की कोई आवाज़ उसने वहाँ नहीं सुनी
जलते हुए दर्द के साथ बस इतना समझ आया
कि उसके पास देने के लिए कोई आशीष नहीं थी।

अनुवादक: अनिल एकलव्य