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खोलो ना केवड़िया अंदर जाने दो जी लाड़ो / मगही

मगही लोकगीत   ♦   रचनाकार: अज्ञात

खोलो ना केवड़िया अंदर जाने दो जी लाड़ो।
बिजली चमके जियरा साले, मेरी लाड़ो।
दिलवा धड़के मेरी लाड़ो॥1॥
तेरा टीका लिए कबसे खड़ा मेरी लाड़ो।
खोलो ना केवड़िया अंदर जाने दो जी लाड़ो॥2॥
तेरा बेसर[1] लिए कबसे खड़ा मेरी लाड़ो।
खोलो ना केवड़िया अंदर जाने दो जी लाड़ो॥3॥
बादल गरजे, जियरा साले मेरी लाड़ो, दिलवा धड़के मेरी लाड़ो।
अंदर आने दो जी लाड़ो, खोलो न केवड़िया॥4॥
तेरी बाली[2] लिए कबसे खड़ा मेरी लाड़ो।
खोलो ना केवड़िया अंदर आने दो जी लाड़ो॥5॥
मेघवा[3] गरजे, जियरा धड़के मेरी लाड़ो।
अंदर आने दो जी लाड़ो, खोलो न केवड़िया॥6॥
तेरा कँगन लिए कबसे खड़ा मेरी लाड़ो।
खोलो ना केवड़िया अंदर जाने दो जी लाड़ो॥7॥
बिजली चमके, जियरा साले मेरी लाड़ो।
अंदर आने दो जी लाड़ो॥8॥

शब्दार्थ
  1. नाक का एक आभूषण
  2. नाक का एक आभूषण
  3. बादल, मेघ