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गड़ौ है हिंडोला नौलख बाग में / ब्रजभाषा

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   ♦   रचनाकार: अज्ञात

गड़ौ है हिंडोला नौलख बाग में जी,
ऐजी जहाँ झूले कुँवरि निहाल।1।
लम्बे-2 झोटा दे रही ऊदा भाट की जी।
एजी कोई आय रही अजब बहार।2।
सात सहेली झूलें मिल संग में जी,
ऐजी कोई गावत राग मल्हार।3।
घुमड़ि 2 के बादल गरजते जी,
ऐजी कोई नहनी-नहनी पड़त फुहार।4।
रिम-झिम 2 मेहा बरसते जी।
ऐजी कोई सीरी-सीरी चलति बयारि।5।
कोकिल बैनी गावें कामिनी जी,
ऐजी कोई आनंद बढ़े अपार।6।
मोर पपीहा बोलत बाग में जी
ऐजी कोई कोयल रही है पुकार।7।
अधिक सुहावनो सावन मास है जी।
ऐजी जाकी शोभा अपरम्पार।8।