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गीत 2 / अठारहवां अध्याय / अंगिका गीत गीता / विजेता मुद्‍गलपुरी

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कुछ विद्वान एहन, जे सब कर्मे के त्याज्य बतावै छै
कुछ तप-दान और यग के नै कखनों त्याज्य बतावै छै।

हे अर्जुन, पहिने तों
त्यागे के बढ़ियाँ से जानोॅ,
त्याग, सात्विक-राजस-तामस
तीन भेद छै मानोॅ,
उत्तम पुरुष सदा जीवन में सात्विक त्याग निभावै छै।

उत्तम पुरुष सदा
राजस-तामस के त्याग करै छै,
यग-दान आरो तप कर्मो
के नै त्याग करै छै,
यग-दान-तप बुद्धिमान के और पवित्र बनावै छै।

दान-यग-तप तीनों के
बन्धन कारक नै मानोॅ,
हय तीनों अन्तः के
पावन कर्ता छिक पहचानोॅ,
ज्ञानी तीनों कर्मो में निष्काम भाव अपनावै छै
कुछ विद्वान एहन, जे सब कर्मे के त्याज्य बतावै छै।