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गीत 9 / छठा अध्याय / अंगिका गीत गीता / विजेता मुद्‍गलपुरी

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योग युक्त अपना के जानोॅ
कोन शक्ति छै योग के अन्दर, एकरा तों अनुमानोॅ।

जे मन-चित्त ईश्वर में रोपै, सकल भोग के त्यागोॅ
जिनकर मन-चित जगत त्यागि केॅ परमेश्वर में लागै
पावै परमानन्द के साधक, उनका योगी मानोॅ
योग युक्त अपना के जानोॅ।

थीर वायु भिर दीपक के लौ जैसे अचल रहै छै
वैसें मन-चित थीर रहै, साधक के ध्यान लगै छै
चित के जीत नित अन्तः के ईश्वर के पहचानोॅ
योग युक्त अपना के जानोॅ।

सदा योग के अभ्यासी परमेश्वर के जे ध्यावै
शुद्ध बुद्धि वाला ध्यानी ही परमेश्वर के पावै
चिदानन्द परमेश्वर के भजि केॅ संतुष्टि लानोॅ
योग युक्त अपना के जानोॅ।

पूर्ण ब्रह्म परमेश्वर छै आरो अपूर्ण हय जग छै
ज्ञान स्वरूप सनातन जे छै, ईश्वर अचल अटल छै
जे आनन्द स्वरूप तत्त्व छिक, उनका तों पहचानोॅ
योग युक्त अपना के जानोॅ।