भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

गोचर हे नगर के बराम्हन, पोथिया बिचारहु हे / मगही

Kavita Kosh से
Sharda suman (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 16:20, 14 जुलाई 2015 का अवतरण ('{{KKGlobal}} {{KKLokRachna |भाषा=मगही |रचनाकार=अज्ञात |संग्रह= }} {{KKCatMagahiR...' के साथ नया पृष्ठ बनाया)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

मगही लोकगीत   ♦   रचनाकार: अज्ञात

गोचर[1] हे नगर के बराम्हन, पोथिया बिचारहु हे।
आजु कन्हइया जी के मूँडन[2] नेओता[3] पेठाएब[4] हे॥
अरिजनि[5] नेओतब, बरिजनि[6] अउरो[7] देआदिन[8] लोग हे।
नेओतब कुल परिवार, कन्हइयाजी के मूंड़न हे॥2॥
काहे लागि रूसल[9] गोतिया[10] लोग, अउरो गोतिनी[11] लोग हे।
काहे लागि रूसले ननदिया, मँड़उआ[12] नहीं सोभले हे॥3॥
का[13] ले[14] मनएबो[15] गोतिया, का ले गोतिनी लोग हे।
अहे, का ले मनएबो ननदिया, मँड़उआ मोर सोभत हे॥4॥
बीरा[16] मनएबो गोतिया, सेनुर[17] ले गोतिनी लोग हे।
अहे, बेसरि ले मनएबो ननदिया, मँड़उआ मोर सोभत हे॥5॥

शब्दार्थ
  1. गोचर = प्रत्येक ग्रह अपनी-अपनी गति के अनुसार चलते हुए निश्चित काल तक किसी न किसी राशि का भोग करता है। उसकी इसी राशिगत चाल को गोचर कहते हैं। जन्मकाल में चंद्र नक्षत्र के अनुसार जिस मनुष्य की जो राशि होगी, उसके अनुसार चलते हुए सूर्यादि नक्षत्र, किसी विशेष राशि, अर्थात कुण्डली के प्रथम, द्वितीयादि स्थानों में जाने पर, जो शुभाशुभ फल देते हैं, उसी को गोचर भोग-फल कहते हैं।
  2. मुंडन संस्कार
  3. निमंत्रण, न्योता
  4. भेजूँगा
  5. परिजन
  6. परिजन, अर्थात् परिजन या अड़ोस पड़ोस क अन्रू लोग। बड़िजनी यानी बड़ी ननद आदि अपने से बड़े सम्बन्धी।
  7. और भी
  8. गोतिनी, पति के भाइयों की पत्नियाँ
  9. रूठे
  10. गोत्र वाले
  11. पति के भाइयों की पत्नियाँ
  12. मण्डप
  13. क्या
  14. लेकर
  15. मनाऊँगा
  16. बीड़ा, पान की गिलौरी
  17. सिन्दूर