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चंदा मामा / श्याम सुन्दर अग्रवाल

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चंदा मामा बड़ा ही प्यारा,
दोस्त वह गुड़िया का न्यारा।
घर -पर जा पहुँचे जब सूरज,
दूर करे थोड़ा अँधियारा ।

छत पर जाकर गुड़िया रानी,
रोज़ रात बतियाती है ।
चमक रहे चंदा मामा को,
बातें बहुत सुनाती है ।

जब पूनो के बाद चाँद को
रोज़-रोज़ यूँ घटते देखा ।
गुड़िया के चेहरे पर आई
फिर चिन्ता की इक रेखा ।

क्या बात है मित्र बतलाओ
क्यों तुम दुबले होते जाते ।
दूध नहीं पीते हो या फिर,
भोजन नहीं चबा कर खाते।

मोटे-ताजे अच्छे लगते,
मुझको तुम गोल-मटोल।
दो बार तुम्हें दूध पिलाए,
मम्मी जी से देना बोल ।

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