भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

चोरी माखन की दै छोड़ि कन्हैया / ब्रजभाषा

Kavita Kosh से
अजय यादव (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 14:12, 26 अप्रैल 2011 का अवतरण (नया पृष्ठ: {{KKGlobal}} {{KKLokRachna |रचनाकार=अज्ञात }} {{KKLokGeetBhaashaSoochi |भाषा=ब्रजभाषा }} <poem> चोरी माखन…)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

   ♦   रचनाकार: अज्ञात

चोरी माखन की दै छोड़ि
कन्हैया मैं समझाऊँ तोय


एक लख धेनु नंद बाबा कें
नित घर माखन होय
दधि माखन तू रोज चुरावै
हँसी हमारी होय
चोरी माखन की दै छोड़ि
कन्हैया मैं समझाऊँ तोय...