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जंगल से जलते बुझते नगर मेरे नाम क्यूँ / शीन काफ़ निज़ाम

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जंगल से जलते बुझते नगर मेरे नाम क्यूँ
मुमकिन नहीं फिर भी मफ़र[1] मेरे नाम क्यूँ

अय्याम[2] जिस में रहते हो आसेब[3] की तरह
ख़्वाबों के ख़ाक-ख़ाक खंडहर मेरे नाम क्यूँ

हमसाए में हजर[4] न कहीं साय-ए-शज़र[5]
जामिद[6] जनम-जनम का सफ़र मेरे नाम क्यूँ

मफ़रूर[7] मुल्ज़िमों सा मसाफ़त[8] में मह्र[9] हूँ
काले समुन्दरों का सफ़र मेरे नाम क्यूँ

शोले की आरजू में करूँ रक़्स[10] उम्र भर
उस ने किया लिबास-ए-शरर[11] मेरे नाम क्यूँ

शब्दार्थ
  1. रक्षा
  2. योम का बहुवचन
  3. भूत-प्रेत
  4. पत्थर
  5. पेड़ की छांह
  6. जड़
  7. भागा हुआ
  8. यात्रा
  9. मग्न
  10. नृत्य
  11. चिंगारी का परिधान