भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

जसोदा तोहर भाग बड़ा लहबर नंदरानी / मगही

Kavita Kosh से
Sharda suman (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 22:40, 11 जून 2015 का अवतरण ('{{KKGlobal}} {{KKLokRachna |भाषा=मगही |रचनाकार=अज्ञात |संग्रह= }} {{KKCatSohar}}...' के साथ नया पृष्ठ बनाया)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

मगही लोकगीत   ♦   रचनाकार: अज्ञात

बधैया

जसोदा तोहर भाग बड़ा लहबर[1] नंदरानी।
देवोकी[2] तोहर भाग बड़ा लहबर हे रानी॥1॥
काहाँ जलमलन[3] हे जदुनन्नन, काहाँ बाजत हे बधावा नंदरानी।
देवोकी घर में जलमलन जदुनन्नन, गोकुला में बाजत बधावा नंदरानी॥2॥
काहे के छूरी से नार छिलायल,[4] काहे के खपर[5] नेहलायल नंदरानी।
सोने के छूरी से नार छिलायल, रूपे के खपर नेहलायल नंदरानी॥3॥
काहे के उजे[6] अँगिया[7] टोपिया, केकरा के तू पहिरयबऽ नंदरानी।
रेसमी के उजे अँगिया टोपिया, केकरा के तू पहिरयबऽ नंदरानी।
रेसमी के उजे अँगिया टोपिया, अपन लाला के पहिरायब नंदरानी॥4॥
केरे[8] लुटवथि अन, धन, लछमी, केरे लुटावथि मोती नंदरानी।
नंद लुटावथि अन, धन, लछमी, जसोदा लुटावथि मोती नंदरानी॥5॥
अइसन[9] जलम लिहल जदुनन्नन, घर बाजे बधावा नंदरानी॥6॥

शब्दार्थ
  1. लहलहाता हुआ; हरा भरा
  2. देवकी, वसुदेव की पत्नी
  3. जन्म
  4. छीला गया, काटा गया
  5. झारी सदृश बरतन, खप्पर
  6. वह जो
  7. चुश्त कुरता
  8. कौन
  9. ऐसा