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जावा गैल्याण्यों, तुम मैत जावा / गढ़वाली

   ♦   रचनाकार: अज्ञात

जावा गैल्याण्यों, तुम मैत जावा,
मेरो रैबार, माँजी मू लि जावा।
मालू भैंसी को खटो दई,
बई मा बोल्यान रोणीकि छई।
बाबाक बोल्यान देखीक जाई,
सासु सैसरों समझाई आई।

शब्दार्थ