भारतीय साहित्य के विशालतम ऑनलाइन संग्रहालय से कुछ आंकड़े (...और गिनती जारी है!)
कविता कोश: 57000+ कुल पन्नें; 2,000+ रचनाकार; 25,000+ कविताएँ; 10,000+ ग़ज़लें; 3,000+ गीत/नवगीत; 1,500+ नज़्में | 125,000+ आगंतुक/माह; 20,000,00+ रचना-पठन/माह
गद्य कोश: 7,000+ कुल पन्नें; 500+ रचनाकार; 1,500+ कहानियाँ; 600+ लघुकथाएँ; 100+ उपन्यास; 600+ आलेख; 300+ निबंध; | 20,000+ आगंतुक/माह; 1,000,00+ रचना-पठन/माह
झील / मधुप मोहता
Kavita Kosh से
आशिष पुरोहित (वार्ता | योगदान)ने किया हुवा 16:18, 11 अक्टूबर 2011का अवतरण
| मुखपृष्ठ » | रचनाकारों की सूची » | रचनाकार: मधुप मोहता | » संग्रह: समय, सपना और तुम |
कुछ ऐसे आती है तुम्हारी याद
जैसे झील के उस पार वह नाव
दिखती तो है,
पर बारिश की बूंदों से सहमकर,
ठहर जाती हो।
मैं करता हूं इंतज़ार।
अक्सर, छू जाती है
परछाईं तुम्हारी मुझे,
पर सूरज के डर से जैसे,
गुलाबी अंधेरों में छिप जाती हो।
मैं तरसा हूं अक्सर तुम्हारी
आवाज़ के लिए,
पर सो जाता हूं,
तुम, मेरे सपनों में गुनगुनाती हो।