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टिकवा जे लइह राजा, बचवा लगाइ हो / मगही

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मगही लोकगीत   ♦   रचनाकार: अज्ञात

टिकवा[1] जे लइह[2] राजा, बचवा[3] लगाइ हो।
टिकुली जे लइह राजा, चमके लिलार हो।
जलदी[4] लउटिह[5] राजा, जड़वा[6] के दिनवाँ हो॥1॥
हँथवा[7] के फरहर[8] धनि, मुँहवाँ के लाएक[9] हो।
से हो[10] कइसे तेजब धनि, जड़वा के दिनवाँ हो।
से हो कइसे तेजब धनि जड़वा के रतवा हो॥2॥
कंठवा जे लइह राजा, सिकड़ी लगाइ हो।
टिकुली जे लइह राजा, चमके लिलार हो।
जलदी लउटिह राजा, जड़वा के दिनवाँ हो॥3॥
हँथवा के फरहर, धनि मुँहवाँ के लाएक हो।
से हो कइसे तेजब धनि जड़वा के रतवा हो।
से हो कइसे तेजब धनि जड़वा के रतवा हो॥4॥

शब्दार्थ
  1. मँगटीका
  2. लाना
  3. झबिया या घुँघरूदार झालर
  4. जल्द ही
  5. लौटना
  6. जाड़ा
  7. हाथ
  8. चुस्त, तत्पर
  9. सज्जन, गुणवान
  10. उसे