भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

तपन लाग्यौ घाम, परत अति धूप भैया / नंददास

Kavita Kosh से
Himanshu (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 22:47, 28 मार्च 2011 का अवतरण

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

(राग सारंग)

तपन लाग्यौ घाम, परत अति धूप भैया, कहँ छाँह सीतल किन देखो ।
भोजन कूँ भई अबार, लागी है भूख भारी, मेरी ओर तुम पेखो ॥
बर की छैयाँ, दुपहर की बिरियाँ, गैयाँ सिमिट सब ही जहँ आवै ।
’नंददास’ प्रभु कहत सखन सों, यही ठौर मेरे जीय भावै ॥