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तू कान का कच्चा है... / अमजद हैदराबादी

तू कान का कच्चा है तो बहरा हो जा,
बदबीं[1] है अगर आँख तो अन्धा हो जा।
गाली-गै़बत[2] दरोग़गोई[3] कब तक?
‘अमजद’ क्यों बोलता है, गूँगा हो जा॥

मत सुन परदेकी बात बहरा हो जा,
मत कह इसरोरे-ग़नी[4] गूँगा हो जा।
वो रूए लतीफ़[5] और यह नापाक नज़र,
‘अमजद’ क्यों देखता है अन्धा हो जा॥

शब्दार्थ
  1. कुदृष्टि
  2. पीठ पीछे बुराई करने की आदत
  3. असत्य सम्भाषण
  4. शत्रु का भेद
  5. सुशील पवित्र नारी का कोमल देह