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तेरे दीवाने तेरी चश्म-ओ-नज़र से पहले / मख़दूम मोहिउद्दीन

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तेरे दीवाने तेरी चश्म-ओ-नज़र से पहले
दार से गुज़रे तेरी राहगुज़र से पहले

बज़्म से दूर वो गाता रहा तन्हा-तन्हा
सो गया साज़ पे सर रख के सहर से पहले

इस अँधेरे में उजालों का गुमाँ तक भी न था
शोला रु[1] शोला नवा[2] शोला नज़र[3] से पहले

कौन जाने के हो क्या रंग-ए सहर[4] रंग-ए चमन[5]
मयकदा रक़्स में है पिछले पहर से पहले

निकहते[6] यार से आबाद है हर कुंजे क़फ़स[7]
मिल के आई है सबा[8] उस गुले तर[9] से पहले ।

शब्दार्थ
  1. आत्मा की ज्वाला
  2. अग्निमय स्वर वाला
  3. आग भड़काने वाली नज़र
  4. सुबह के रंग
  5. उपवन का रंग
  6. सुगंध
  7. पिंजरे का हर कोना
  8. सुबह की हवा
  9. ताज़े फूल