भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

तो आँखों से अश्कों की बरसात होगी / शीन काफ़ निज़ाम

Kavita Kosh से
Shrddha (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 23:20, 20 सितम्बर 2009 का अवतरण (नया पृष्ठ: {{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=शीन काफ़ निज़ाम |संग्रह=सायों के साए में / शीन का...)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

तो आँखों से अश्क़ों की बरसात होगी
अगर ज़िन्दगी से मुलाक़ात होगी

मैं बहती नदी हूँ तू वादी का सीना
खुदा जाने फिर कब मुलाक़ात होगी

मुसाफ़िर हैं लेकिन नहीं कोई मंजिल
जहाँ दिन ढलेगा वहीँ रात होगी

सारे शाम ही दिल घुमड़ने लगा है
लगे है कि इस रात बरसात होगी

दरख़्तों के दामन से उलझेंगी किरणें
कहीं दिन उगेगा कहीं रात होगी

ज़मीं जब ज़माने सभी खा चुकेगी
परिंदों की आवाज़ सौगात होगी

जहाँ सांस टूटेगी अपनी वही से
नए इक सफ़र की शुरुआत होगी