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दयारे-इश्क़ में अपना मुक़ाम पैदा कर / इक़बाल

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अपने पुत्र के लिए लंदन से भेजा गया उनका पहला ख़त

दयारे-इश्क़ में अपना मुक़ाम पैदा कर
नया ज़माना नए सुब्ह-ओ-शाम पैदा कर

ख़ुदा अगर दिले-फ़ितरत-शनास [1] दे तुझको
सुकूते-लाल-ओ-गुल[2] से कलाम पैदा कर

उठा न शीशा-गराने-फ़िरंग के अहसाँ
सिफ़ाले-हिन्द[3] से मीना-ओ-जाम पैदा कर

मैं शाख़े-ताक़[4] हूँ मेरी ग़ज़ल है मेरा समर[5]
मिरे समर से मय-ए- लालाफ़ाम[6] पैदा कर

मिरा तरीक़[7] अमीरी नहीं फ़क़ीरी है
ख़ुदी न बेच ग़रीबी में नाम पैदा कर
 

शब्दार्थ
  1. प्रकृति को पहचानने वाला दिल
  2. फूलों की चुप्पी
  3. हिन्दोस्तान की मिट्टी
  4. अंगूर की टहनी
  5. फल
  6. फूलों के रंग जैसी(लाल) मदिरा
  7. तरीक़ा