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दराज़ है शबे-ग़म, सोज़-ओ-साज़ साथ रहे / मख़दूम मोहिउद्दीन

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दराज़[1] है शबे ग़म, सोज़-ओ-साज़ साथ रहे
मुसाफ़िरो ! मय-ए मीना गुदाज़ साथ रहे

क़दम-क़दम पे अँधेरों का सामना है यहाँ
सफ़र कठिन है दमे शोला साज़ साथ रहे

ये कोह[2] क्या है ये दश्ते अलम फ़जा[3] क्या है
जो इक तेरी निगह-ए-दिल नवाज़ साथ रहे

कोई रहे न रहे एक आह एक आँसू
बसद खुलस[4] बसद इम्तियाज़[5] साथ रहे

ये मयकदा है, नहीं सैर-ए दैर[6] सैर-ए हरम
नज़र अफीफ[7] दिले पाकबाज़[8] साथ रहे ।

शब्दार्थ
  1. लम्बी
  2. पर्वत
  3. दुख के जंगल का वातावरण
  4. निष्कपटताएँ
  5. विवेक
  6. मस्जिद और मन्दिर
  7. पवित्र दृष्टि
  8. पवित्र दिल वाला