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दर्पण में अपने ख़ुद के चेहरे पर / एज़रा पाउंड / एम० एस० पटेल

ओह ! दर्पण में अपरिचित चेहरा !
ओह ! अश्लील संगति, वाह ! सन्त जैसा आतिथेय,
वाह ! मेरे शोक-सन्तप्त मूर्ख,
क्या जवाब है ? ओह १ तुम जो
कोशिश और अभिनय करते गुज़रते असंख्य हो,
मैं ? मैं ? मैं ?
हँसी-मज़ाक, चुनौती, प्रतिझूठ

                  और तुम क्या हो ?
 
मूल अँग्रेज़ी से अनुवाद : एम० एस० पटेल

लीजिए अब मूल अँग्रेज़ी में यही कविता पढ़िए
                  Ezra Pound
      On His Own Face In A Glass

O strange face there in the glass!
O ribald company, O saintly host,
O sorrow-swept my fool,
What answer? O ye myriad
That strive? and play and pass,
Jest, challenge, counterlie!
I? I? I?
And ye?