Last modified on 6 सितम्बर 2016, at 04:33

दसरत को लछीमन बाल जीत / गढ़वाली

   ♦   रचनाकार: अज्ञात

दसरत को लछीमन बाल जीत।
चौदा बरस तपोवन रहियो, ताप नि लाग्यो एक रती।
चौदा बरस हिमाचल रहियो, जाड़ो नि लाग्यो एक रती।
चौदा बरस सीता संग रहियो, पाप नि लाग्यो एक रती।
खोला किवाड़[1], चला मठ भीतर
दर्शन देओ लाई, अंबे! झुलती रहों
गाय को गोबर चोपड़ माटी
चौका देवत माई अंबे झुलती रहो

शब्दार्थ
  1. दरवाजे