Last modified on 10 जनवरी 2010, at 11:13

दाख़िल-ओ- खारिज़ / शीन काफ़ निज़ाम

Shrddha (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 11:13, 10 जनवरी 2010 का अवतरण

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)

जाने कितने जन्मों के जज़ीरे
अभी हमारे आगे हैं
क्या यूँ ही अंधे अक़ीदे हर बार
इस्तक़बाल को सामने आयेंगे
हमें भी शायद अब तक
सुकून का इंतज़ार करना पड़ेगा
जब तक
हमारे अन्दर का कुहरा
बाहर के सन्नाटे में
घुल -मिल नहीं जाता