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दीवा जसी ज्योति / केशव ध्यानी

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चन्दी गड़ी बन्दी,
कैकी सुआ ह्वैली इनी, लगुती[1] सी लफन्दी,
दीवा जसी ज्योति।
चदरी, की खाँप
कैकी सुआ ह्वैली इनी, सैलूजसी लाँप,
दीवा जसी ज्योति।

पाणी जसी पथलीं[2]
रुआँ[3] जसी हपली[4]
डाली जसी सुड़सड़ी,
कंठ की सी बड़ली।

बखर्यों की तान्द,
कैकी सुआ ह्वैली इनी, टपरान्दी चकोर,
दीवा जसी ज्योति।
धुआँ जसी धुपेली,
नौ गज की धमेली।
राजुला जसी राणी,
केला जसी हतेली।

की टकोर,
कैकी सुआ ह्वैली इनी, टपरान्दी चकोर,
दीवा जसी ज्योति।
स्वींणा सी लिख्वार की,
पिरथी की सि मोल।
बालो सूरिज बाँको,
सोना जसी-तोल।

वास की बडुली
मिरग सी आँखी सुआ कुमर्यालि लटूत्ता,
दीवा जसी ज्योति।

नौ सोर मुरली का,
गिताँग जसी गैली।
बुराँस जनी फूल,
फ्योंलि जनी रौतेली।

लगुड़ी लचीली,
कै चाल चलदी सुआ, साज सी सजीली
दीवा जसी ज्योति॥

शब्दार्थ
  1. लता
  2. पतली
  3. रुई
  4. हल्की