भारतीय साहित्य के विशालतम ऑनलाइन संग्रहालय से कुछ आंकड़े (...और गिनती जारी है!)
कविता कोश: 57000+ कुल पन्नें; 2,000+ रचनाकार; 25,000+ कविताएँ; 10,000+ ग़ज़लें; 3,000+ गीत/नवगीत; 1,500+ नज़्में | 125,000+ आगंतुक/माह; 20,000,00+ रचना-पठन/माह
गद्य कोश: 7,000+ कुल पन्नें; 500+ रचनाकार; 1,500+ कहानियाँ; 600+ लघुकथाएँ; 100+ उपन्यास; 600+ आलेख; 300+ निबंध; | 20,000+ आगंतुक/माह; 1,000,00+ रचना-पठन/माह
नहीं, हरगिज़ नहीं / मदन मोहन दानिश
Kavita Kosh से
| मुखपृष्ठ » | रचनाकारों की सूची » | रचनाकार: मदन मोहन दानिश |
मेरे आबाद लम्हों में
मेरी वीरानियों में भी
जो कोई साथ होता है
तो वो बस एक तू ही है
हज़ारों कोशिशें की
तुझपे कोई नज़्म कह डालूँ
कहानी कोई लिक्खूँ
या कि कोई गीत ही रच दूँ
मगर एहसास को तेरे
कोई एक रूप दे देना
मगर विस्तार को तेरे
किसी एक हद में ले आना
नहीं, हरगिज़ नहीं है मेरे बस में
मेरे बस में ...माँ !