भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

नाया रे जोमन सइयाँ लवलन पनियाँ भेजल हो राम / मगही

Kavita Kosh से
Sharda suman (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 19:37, 28 जुलाई 2015 का अवतरण ('{{KKGlobal}} {{KKLokRachna |भाषा=मगही |रचनाकार=अज्ञात |संग्रह= }} {{KKCatMagahiR...' के साथ नया पृष्ठ बनाया)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

मगही लोकगीत   ♦   रचनाकार: अज्ञात

नाया रे जोमन[1] सइयाँ लवलन[2] पनियाँ भेजल[3] हो राम।
सिर लेले सोनेे गेंडुरिया[4] गेडुर सिर गागर हो राम॥1॥
देखलूँ हम कुइयाँ केरा[5] रीत[6] अलि घबड़ायल हो राम।
कुइयाँ पर भेलइ बड़ा भीर, घयली[7] मोर टूटल हो राम।
का लेके होबइ[8] हजूर[9] बाँह मोर टूटल हो राम॥2॥
सास मोर सूतलइ कोठरिया, ननद कोठा ऊपर हो राम।
सामी मोरा सूतलन अगम घर, कइसे उनखा[10] जगइती[11] हो राम॥3॥
उठु-उठु ननदी अभागिन, भइया के जगावहु हो राम।
पाँच चोर घरवा में घूसल, परान के बचावहु हे राम॥4॥
नहिं उठइ ननदी अभागिन, भइया के जगावइ हो राम।
पाँचो चोर घरवा में घूसल, नहीं परान बाँचत हो राम॥5॥
सुखिया[12] हइ[13] संसार, सुखे रे नीन सोवइह[14] हो राम।
दुखिया दास कबीर, हरि के नाम गावत हो राम॥6॥

शब्दार्थ
  1. यौवन, जवानी
  2. लाये
  3. पानी भरने के लिए
  4. गेंडुरी, इंडुरी; एक गोलाकार उपकरण, जिसे सिर पर रखकर, उसके ऊपर घड़े को रखा जाता है
  5. का, की
  6. रीति
  7. घड़ा
  8. होऊँगी
  9. सामने, सम्मुख
  10. उन्हें
  11. जगाती
  12. सुखी
  13. है
  14. सोता है