भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

"न बारे-दर्दो-ग़म इतना उठाओ / दरवेश भारती" के अवतरणों में अंतर

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज
('{{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=दरवेश भारती |अनुवादक= |संग्रह= }} {{KKCat...' के साथ नया पृष्ठ बनाया)
 
(कोई अंतर नहीं)

14:57, 4 दिसम्बर 2019 के समय का अवतरण

न बारे-दर्दो-ग़म इतना उठाओ
ज़रा-सी जान पर मत ज़ुल्म ढाओ

किसी को चाहने की शर्त है यह
उसी की याद में बस डूब जाओ

है जिसको देखने की इतनी चाहत
बनाओ उसको आइना बनाओ

सजावट लाज़िमी है ज़िंदगी में
सजो खुद साथ औरों को सजाओ

फ़ना क्या है समझना हो जो 'दरवेश'
उठो, और दाव पर खुद को लगाओ