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पहिला दरद जब आयल, सासु गोड़ लागले हे / मगही

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मगही लोकगीत   ♦   रचनाकार: अज्ञात

पहिला दरद जब आयल, सासु गोड़[1] लागले हे।
सासु, अब न करम अइसन[2] काम, दरद अँग सालइ[3] हे॥1॥
दोसर दरद जब उठल, ननदी गोड़ लागल हे।
ननदी, अब न जयबइ सामी सेज, दरद हिया सालइ हे॥2॥
तेसर दरद जब उठल, होरिला जलम लेल हे।
बजे लागल अनन्द बधइया, महल उठे सोहर हे॥3॥

शब्दार्थ
  1. गोड़ लागल = पैर पड़ना, प्रणाम किया
  2. इस तरह का
  3. सूल देना, दर्द करना