भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

पेड़-2 / अदोनिस

Kavita Kosh से
Anupama Pathak (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 19:12, 20 दिसम्बर 2017 का अवतरण

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

कभी भाला लेकर नहीं चला मैं, न ही कभी
काटा कोई सर,
गर्मियों और सर्दियों में
मैं गौरैया की तरह चला जाता हूँ उड़कर
भूख की नदी की ओर, पानी से बनी इसकी जादुई सरहदों की ओर ।

मेरी हुक़ूमत बनाती है पानी का रूप ।
मैं राज करता हूँ गैरहाज़िरी पर ।
राज करता हूँ ताज्जुब और तकलीफ़ में,
साफ़ मौसम और तूफ़ानों में ।

कोई फ़र्क नहीं पड़ता मैं नज़दीक आऊँ या दूर चला जाऊँ ।
मेरी हुकूमत है रोशनी में
और धरती है मेरे घर का दरवाज़ा ।


अँग्रेज़ी से अनुवाद : मनोज पटेल