भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

पोसतू का छुमा, मेरी भग्यानी बा / गढ़वाली

Kavita Kosh से
Lalit Kumar (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 04:33, 6 सितम्बर 2016 का अवतरण ('{{KKGlobal}} {{KKLokRachna |रचनाकार=अज्ञात }} {{KKLokGeetBhaashaSoochi |भाषा=गढ़वाली }...' के साथ नया पृष्ठ बनाया)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

   ♦   रचनाकार: अज्ञात

पोसतू[1] का छुमा, मेरी भग्यानी बा[2]
आज की छोपती, मेरी भग्यानी बौ।
रै तुमारा जुमा, मेरी भग्यानी बौ।
अखोडू का डोका[3], मेरी भग्यानी बौ।
रै तुम्हारा जुमा, मेरी भग्यानी बौ,
हम अजाण लोका, मेरी भग्यानी बौ।
बाजी त छुड़ीका[4] मेरी भग्यानी बौ,
इनू देण दुवा[5], मेरी भग्यानी बौ,
हींग सा तुड़ीका[6] मेरी भग्यानी बौ।
काखड़[7] की सींगी, मेरी भग्यानी बौ,
रातू क सुपिना देखी, मेरी भग्यानी बौ।
दिन आँख्यों रींगी, मेरी भग्यानी बौ,
बान[8] को हरील[9], मेरी भग्यानी बौ,
रिंगदों रिंगदो[10], मेरी भग्यानी बौ,
त्वै मुंग[11] सील[12], मेरी भग्यानी बौ।

शब्दार्थ
  1. पोस्त का फूल
  2. भावी
  3. पत्ते
  4. छुड़की
  5. दोहा
  6. काकड़
  7. काकड़
  8. बांज, पेड़
  9. हरियाली
  10. घूमता घूमता
  11. कपास
  12. शरीर