भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

प्रदूषण (हाइकु) / भावना कुँअर

Kavita Kosh से
Dr. ashok shukla (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 07:54, 28 जुलाई 2014 का अवतरण

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

(प्रदूषण)
आसमान में
काले सर्प-सा धुआँ
फन फैलाए

(आस)
छोड़ो ना तुम
 यूँ आस का दामन
 होगा सवेरा

(सफ़र)
जब भी मिली
 हमें तो सफ़र में
 धूप ही मिली

(आँधी )
तेज थी आँधी
टूटा गुलमोहर
सपनों –जैसा

(पतझर)
शर्माई लता
ढूँढती फिरे वस्त्र
पतझर में