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"प्रसङ्ग अर्कै छ / सुमन पोखरेल" के अवतरणों में अंतर

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22:32, 29 जून 2019 के समय का अवतरण

मुटु फेरिए झैँ, धड्कनको ढङ्ग अर्कै छ
छोयो कसले मनको तार, तरङ्ग अर्कै छ
 
कतै थिएँ मरेतुल्य तिमीलाई भेट्नु अघि
यो कुन म बाँच्दैछु, अचेल उमङ्ग अर्कै छ
 
हर्षित् भई नयाँ जोशले धड्किँ दैछ मुटु
हेरेथि'न् मायाले आँखामा, दङ्ग अर्कै छ
 
कति धेरै पोखिछ्यौ ममाथि तिम्रो माया
ऐनाले भन्यो मेरो मुहारको रङ्ग अर्कै छ
 
खुम्च्याइ छ निधारमा नजर छ अन्तै कतै
मुस्काऊ चाहे जति नै कुरो छर्लङ्ग अर्कै छ
 
भेट्न आइन् उनी, विचार गर्नु सुमन !
माया कै कुरो गर्लास्, आज प्रसङ्ग अर्कै छ