प्रेम-1 / दुष्यन्त - Kavita Kosh
rilpoint_mw113
मुखपृष्ठ  » रचनाकारों की सूची  » रचनाकार: दुष्यन्त  » प्रेम-1

 
मैने नहीं की पूजा
उस परमपिता की
न ही किया सुमिरन

किंतु जब तुमने
अपने भगवान से
मांग लिया मुझे

मैं आठों पहर का पुजारी हो गया।

 
मूल राजस्थानी से अनुवाद- मदन गोपाल लढ़ा