भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

फुल्लां दी बहार राती आयों न / पंजाबी

Kavita Kosh से
Sandeep Sethi (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 10:40, 26 फ़रवरी 2010 का अवतरण (फुल्लां दी बहार राती आयों न. / का नाम बदलकर फुल्लां दी बहार राती आयों न / पंजाबी कर दिया गया है)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

   ♦   रचनाकार: अज्ञात

फुल्लां दी बहार राती आयों न
शाव्वा राती आयों न
फुल गये कुम्ला गोरी मन भायो न
शाव्वा राती आयों न

आसे पावां पासे पावां विच विच पावां कलियाँ
जे मेरा रान्जण न मिलया, मैं ढुंडियां सारियां गालियाँ

आसे पावां पासे पावां विच विच पान्वां रेशम
जे मेरा रान्जण न मिलया मैं ढूंडा सारा टेशन

राती आयों न ...

इक मेरा रान्जण आया-शाव्वा
दिल दा सांजण आया-शाव्वा
दिल दी मस्ती आई- शाव्वा
खिड़ खिड़ हस्दी आई-शाव्वा
इक मेरा लाल गवाचा- शाव्वा
लाल गुपाल गवाचा-शाव्वा

नी सुण मेरिये माए-शाव्वा
दीवा बाल चुबारे-शाव्वा
नी मेरा दिल घबराया-शाव्वा
नी मेरा लाल न आया-शाव्वा
लाल गुपाल न आया-शाव्वा

राती आयों न...