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फूल भए जिन्दगी / धनेन्द्र विमल

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फूल भए जिन्दगी देउतालाई चढाइदिन्थें
कागज भए यो जिन्दगी सलाई कोरी जलाइदिन्थें

जिन्दगी यो के भो के भो आफैंलाई थाहा छैन
छातीभित्र मुटु चल्छ तर कुनै चाह छैन
खोटो मोहोर भए जीवन झुक्याएर चलाइदिन्थें

टुहुरो भयो मेरो जीवन यसको कतै बास छैन
मान्छे धेरै छन् नाता छैन बाँचिरहेछु सास छैन
आँसु मात्रै भए जीवन आँखाबाट खसाइदिन्थें

यो मन पनि मरिसक्यो ब्युँझने आस छैन
ओइलिसके सारा रहर अब कुनै मधुमास छैन
थोत्रो लुगा भए जीवन जड्यौरीमा चलाइदिन्थें

शब्द - धनेन्द्र विमल
स्वर - कुमार सानु
चलचित्र - अर्पण