भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

बचपन / आन येदरलुण्ड

Kavita Kosh से
Anupama Pathak (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 21:01, 20 दिसम्बर 2017 का अवतरण ('{{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=आन येदरलुण्ड |अनुवादक=अनुपमा पाठ...' के साथ नया पृष्ठ बनाया)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

बचपन लुप्त सा धूमिल हो रहा है
बड़ी देर तक शांत पड़ी रही मैं
श्वेत ताबूत से पत्तों की मीठी खुशबू आ रही है
मिठास की सुगंध से संतृप्त

बचपन लुप्त सा अँधेरे में ओझल हो रहा है
घड़ियाँ चट्टान के रूप में ढल रही हैं
घड़ियाँ जिन्हें आपको वैसे भी त्यागना ही है
गाल के खुले क्षिद्रों से प्यारी खुशबू आ रही है

मूल स्वीडिश से अनूदित