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बशीर बद्र
Kavita Kosh से
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बशीर बद्र www.kavitakosh.org/bashirbadr | |||
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जन्म: 30 अप्रैल 1945
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| उपनाम | बद्र | ||
| जन्म स्थान | भोपाल, मध्यप्रदेश, भारत | ||
| कुछ प्रमुख कृतियाँ | उजाले अपनी यादों के, उजालों की परियाँ, आस, रोशनी के घरौंदे | ||
| विविध | इनका पूरा नाम सैयद मोहम्मद बशीर है । वर्ष 1999 में भारत सरकार द्वारा 'पद्मश्री' से सम्मानित किया गया । | ||
| जीवनी | बशीर बद्र / परिचय | ||
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Bashir Badr, Basheer | |||
ग़ज़ल संग्रह
- आस / बशीर बद्र
- उजाले अपनी यादों के / बशीर बद्र
- उजालों की परियाँ / बशीर बद्र
- रोशनी के घरौंदे / बशीर बद्र
- सात जमीनें एक सितारा / बशीर बद्र
- फूलों की छतरियाँ / बशीर बद्र
- मुहब्बत खुशबू है / बशीर बद्र
कुछ प्रतिनिधि ग़ज़लें <sort order="asc" class="ul">
- कभी यूँ मिलें कोई मसलेहत, कोई ख़ौफ़ दिल में ज़रा न हो / बशीर बद्र
- वो चांदनी का बदन ख़ुशबूओं का साया है / बशीर बद्र
- सर से चादर बदन से क़बा ले गई / बशीर बद्र
- मोहब्बतों में दिखावे की दोस्ती ना मिला / बशीर बद्र
- वो थका हुआ मेरी बाहों में ज़रा / बशीर बद्र
- सुबह का झरना / बशीर बद्र
- हमारा दिल / बशीर बद्र
- आ चांदनी भी मेरी तरह जाग रही है / बशीर बद्र
- आँसुओं की जहाँ पायमाली रही / बशीर बद्र
- आस होगी न आसरा होगा / बशीर बद्र
- अभी इस तरफ़ न निगाह कर / बशीर बद्र
- ऐ हुस्न-ए-बेपरवाह तुझे शबनम कहूँ शोला कहूँ / बशीर बद्र
- ऐसा लगता है ज़िन्दगी तुम हो / बशीर बद्र
- भीगी हुई आँखों का ये मन्ज़र न मिलेगा / बशीर बद्र
- भूल शायद बहुत बड़ी कर ली / बशीर बद्र
- दुआ करो कि ये पौधा सदा हरा ही लगे / बशीर बद्र
- दूसरों को हमारी सज़ायें न दे / बशीर बद्र
- गाँव मिट जायेगा शहर जल जायेगा / बशीर बद्र
- गुलाबों की तरह दिल अपना / बशीर बद्र
- ग़म छुपाते रहे मुस्कुराते रहे / बशीर बद्र
- कभी तो आसमाँ से चांद उतरे जाम हो जाये / बशीर बद्र
- कभी यूँ भी आ मेरी आँख में के मेरी नज़र को ख़बर न हो / बशीर बद्र
- कहीं चांद राहों में खो गया / बशीर बद्र
- ख़ुदा हम को ऐसी ख़ुदाई न दे / बशीर बद्र
- ख़ुश रहे या बहुत उदास रहे / बशीर बद्र
- ख़ुशबू की तरह आया वो तेज़ हवाओं में / बशीर बद्र
- ख़्वाब इन आँखों से अब कोई चुरा कर ले जाये / बशीर बद्र
- किस ने मुझ को सदा दी बता कौन है / बशीर बद्र
- कोई काँटा चुभा नहीं होता / बशीर बद्र
- कुछ तो मैं भी बहुत दिल का कमज़ोर हूँ / बशीर बद्र
- मान मौसम का कहा छाई घटा जाम उठा / बशीर बद्र
- मैं भी शायद बुरा नहीं होता / बशीर बद्र
- मिल भी जाते हैं तो कतरा के निकल जाते हैं / बशीर बद्र
- मेरे साथ तुम भी दुआ करो / बशीर बद्र
- मोम की ज़िन्दगी घुला करना / बशीर बद्र
- मुझसे बिछड़ के ख़ुश रहते हो / बशीर बद्र
- मुसाफ़िर के रस्ते बदलते रहे / बशीर बद्र
- मुस्कुराती हुई धनक है वही / बशीर बद्र
- पत्थर के जिगर वालों ग़म में वो रवानी है / बशीर बद्र
- सर पे साया सा दस्त-ए-दुआ याद है / बशीर बद्र
- सौ ख़ुलूस बातों में सब करम ख़यालों में / बशीर बद्र
- शबनम के आँसू फूल पर / बशीर बद्र
- सिसकते आब में किस की सदा है / बशीर बद्र
- सोचा नहीं अच्छा बुरा देखा सुना कुछ भी नहीं / बशीर बद्र
- सुन ली जो ख़ुदा ने वो दुआ तुम तो नहीं हो / बशीर बद्र
- वही ताज है वही तख़्त है / बशीर बद्र
- वो ग़ज़ल वालों का उस्लूब समझते होंगे / बशीर बद्र
- वो महकती पलकों की ओट / बशीर बद्र
- सब कुछ खाक हुआ है लेकिन / बशीर बद्र
- याद किसी की चांदनी बन कर / बशीर बद्र
- ये चांदनी भी जिन को छूते हुए डरती है / बशीर बद्र
- ये चिराग़ बेनज़र है ये सितारा बेज़ुबाँ है / बशीर बद्र
- चंद शेर / बशीर बद्र
- साथ चलते आ रहे हैं पास आ सकते नहीं / बशीर बद्र
- मैं कब कहता हूँ / बशीर बद्र
- राख हुई आँखों की / बशीर बद्र
- मैंने तेरी आँखों में पढ़ा / बशीर बद्र
- तेरा हाथ मेरे काँधे / बशीर बद्र
- परखना मत, परखने में कोई अपना नहीं रहता / बशीर बद्र
- इन आंखों से दिन रात बरसात होगी / बशीर बद्र
- रात के साथ रात लेटी थी / बशीर बद्र
- कुछ तो मजबूरियाँ रही होगी / बशीर बद्र
- रात आँखों में ढली पलकों पे जुगनूँ आए / बशीर बद्र
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