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"बीच सागर में / अनातोली परपरा" के अवतरणों में अंतर

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इस तन्हाई में फकीरे
 
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दिन बीते धीरे-धीरे
 
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:::यहाँ सागर की राहों में
 
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कभी नभ में छाते बादल
 
कभी नभ में छाते बादल
 
 
बजते ज्यूँ बजता मादल
 
बजते ज्यूँ बजता मादल
 
 
:::मन हर्षित होते घटाओं के
 
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सागर का खारा पानी
 
सागर का खारा पानी
 
 
धूप से हो जाता धानी
 
धूप से हो जाता धानी
 
 
:::रंग लहके पीत छटाओं के
 
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जब याद घर की आती
 
जब याद घर की आती
 
 
मन को बेहद भरमाती
 
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:::स्वर आकुल होते चाहों के
 
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बस श्वेत-सलेटी पाखी
 
बस श्वेत-सलेटी पाखी
 
 
जब उड़ दे जाते झाँकी
 
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:::मलहम लगती कुछ आहों पे
 
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22:02, 7 मई 2010 के समय का अवतरण

मुखपृष्ठ  » रचनाकारों की सूची  » रचनाकार: अनातोली परपरा  » संग्रह: माँ की मीठी आवाज़
»  बीच सागर में

इस तन्हाई में फकीरे
दिन बीते धीरे-धीरे
यहाँ सागर की राहों में
कभी नभ में छाते बादल
बजते ज्यूँ बजता मादल
मन हर्षित होते घटाओं के
सागर का खारा पानी
धूप से हो जाता धानी
रंग लहके पीत छटाओं के
जब याद घर की आती
मन को बेहद भरमाती
स्वर आकुल होते चाहों के
बस श्वेत-सलेटी पाखी
जब उड़ दे जाते झाँकी
मलहम लगती कुछ आहों पे