भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

बीजी जावा बीजी, हे खोली का गणेश / गढ़वाली

Kavita Kosh से
Lalit Kumar (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 03:52, 6 सितम्बर 2016 का अवतरण ('{{KKGlobal}} {{KKLokRachna |रचनाकार=अज्ञात }} {{KKLokGeetBhaashaSoochi |भाषा=गढ़वाली }...' के साथ नया पृष्ठ बनाया)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

   ♦   रचनाकार: अज्ञात

बीजी जावा बीजी[1], हे खोली[2] का गणेश
बीजी जावा बीजी, हे मोरी का नारेण[3]
बीजी जावा बीजी, हे खतरी[4] का खैंडो[5]
बीजी जावा बीजी, हे कूंती का पंडौऊं[6]
बीजी जावा बीजी, हे काँठ्यों[7] उदंकारों[8]
बीजी जावा बीजी, हे नौखंडी[9] नरसिंह
बीजी जावा बीजी, हे संभु भोलेनाथ
बीजी जावा बीजी, हे रात की चाँदनी
बीजी जावा बीजी, हे दिन का सूरज
बीजी जावा बीजी, हे ऐंच का आगास[10]
बीजी जावा बीजी, हे नीस[11] की धरती
बीजी जावा बीजी, हे नौ खोली का नागों

शब्दार्थ
  1. जागो जागो हे
  2. पौर
  3. नारायण
  4. क्षेत्रपाल
  5. तलवार
  6. पांडव
  7. चोरियों का
  8. प्रकाश
  9. नौ भाग धरती के
  10. आकाश
  11. नीचे