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भर आया आख्यां में पाणी मामा की शक्ल पछाण कैं / मेहर सिंह

वार्ता- सज्जनों जब अंजना को ऋषि की कुटी में रहते हुए कुछ समय गुजर जाता है तो एक दिन उस का मामा जंगल में शिकार खेलता हुआ वहां पहुंच जाता है तो अंजना उसे पहचान लेती है और अपणे दिल में क्या विचार करती है-

भर आया आख्यां में पाणी मामा की शक्ल पछाण कैं।टेक

मनै तै वृथाए जिन्दगी खोली
मेरी गैल्यां सब अणहोणी होली
वा सासु बोली माणस खाणी कर्या उट मटीला जाण कै।

मैं तो मारी करूं थी शर्म की
आज या खुलगी गांठ भ्रम की
थी मेरे कर्म की हाणी ना दया हुई मां डायण कै

मेरी देही में ना थी खामी
सिर पै बांध दई बदनामी
या मामी पास खड़ी महाराणी दया ले लेगी आण कै

विपता नै करदी तंग
न्यू बिगड़ग्या काया का रंग
मेहर सिंह गया सीख रागनी गाणी सतगुरु का ज्ञान बखाण कै।

वार्ता- सज्जनों अंजना के गर्भ को नौ मास पूरे हो जाते हैं तथा ऋषि की कुटिया में वह एक लड़के को जन्म देती है। जिसका नाम हनुमान रखा जाता है उधर अंजना का मामा प्रतिसूरज शिकार खेलता हुआ ऋषि की कुटी पर पहुंच जाता है और अंजना को अपने साथ ले जाते हैं। राजा विद्याधर के पास खबर भेज देते हैं। राजा विद्याधर जब अपने विमान द्वारा अंजना और हनुमान को ले जा रहे थे तो हनुमान नीचे पत्थर की शिला पर गिर जाते हैं हनुमान सुरक्षित रहते हैं तथा पत्थर की शिला टूट जाती है इससे इसका नाम बजरंग बली पड़ा। इस प्रकार यह किस्सा यही पर समाप्त होता है। बोलो नगर खेड़े की जय।