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"मन के सूरज का ढुलकना / अमिता प्रजापति" के अवतरणों में अंतर

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यह जीवन का आसमान है
 
यह जीवन का आसमान है

00:12, 5 नवम्बर 2009 के समय का अवतरण

यह जीवन का आसमान है
यहाँ सारे सम्बन्ध
सितारों की तरह चमक रहे हैं

इन सितारों को
फूलों की तरह चुनकर
कुरते पर टाँक लूँ
मोतियों की तरह माला बनाकर
देह पर सजा लूँ

लेकिन मेरे मन का सूरज
ढुलक कर दूर चला गया है

अब मैं नहीं खोजना चाहती अंधेरे में
प्रेम की सुई

खुले आसमान के नीचे
रात की ठंडक में
मैं एक भरपूर नींद लेना चाहती हूँ