भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

मास्को / मख़दूम मोहिउद्दीन

Kavita Kosh से
अजय यादव (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 08:41, 28 अप्रैल 2011 का अवतरण

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

मास्को के हवाई अड्डे पर उतरते हुए

हिन्द की दुखियारी जनता का सलाम ले ले
पयाम ले ले
मेरे साथ मास्को
सात नवम्बर की ज्योति से हमने रस्ता पाया
हमने अपना ख़ून बहाकर तुझ से हाथ मिलाया
जगत की जनता से मिलजुल कर जीवन गीत बनाया
तेरे नाम से तेरे काम से हर सूं दीप जलाया
हिन्द की दुखियारी जनता का सलाम ले ले
पयाम ले ले
मेरे साथी मास्को