भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

"मुक्तिकामी चेतना अभ्यर्थना इतिहास की / अदम गोंडवी" के अवतरणों में अंतर

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज
(नया पृष्ठ: {{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=अदम गोंडवी }} Category:ग़ज़ल <poem> मुक्तिकामी चेतना अभ...)
 
 
(एक अन्य सदस्य द्वारा किया गया बीच का एक अवतरण नहीं दर्शाया गया)
पंक्ति 5: पंक्ति 5:
 
[[Category:ग़ज़ल]]
 
[[Category:ग़ज़ल]]
 
<poem>
 
<poem>
 
 
 
मुक्तिकामी चेतना अभ्यर्थना इतिहास की
 
मुक्तिकामी चेतना अभ्यर्थना इतिहास की
 
यह समझदारों की दुनिया है विरोधाभास की
 
यह समझदारों की दुनिया है विरोधाभास की
पंक्ति 22: पंक्ति 20:
 
होता है परिपाक धीमी आँच पर एहसास की.
 
होता है परिपाक धीमी आँच पर एहसास की.
 
</poem>
 
</poem>
 
{{KKGlobal}}
 

22:21, 3 नवम्बर 2009 के समय का अवतरण

मुक्तिकामी चेतना अभ्यर्थना इतिहास की
यह समझदारों की दुनिया है विरोधाभास की

आप कहते हैं इसे जिस देश का स्वर्णिम अतीत
वो कहानी है महज़ प्रतिरोध की ,संत्रास की

यक्ष प्रश्नों में उलझ कर रह गई बूढ़ी सदी
ये परीक्षा की घड़ी है क्या हमारे व्यास की?

इस व्यवस्था ने नई पीढ़ी को आखिर क्या दिया
सेक्स की रंगीनियाँ या गोलियाँ सल्फ़ास की

याद रखिये यूँ नहीं ढलते हैं कविता में विचार
होता है परिपाक धीमी आँच पर एहसास की.