मुण्डकोपनिषद / मृदुल कीर्ति

Kavita Kosh से
यहां जाएं: भ्रमण, खोज

ॐ श्री परमात्मने नमः

मुंडकोपनिषद
शान्ति पाठ
हे देव गण !कल्याण मय हम वचन कानों से सुनें,
कल्याण ही नेत्रों से देखें, सुदृढ़ अंग बली बनें।
आराधना स्तुति प्रभो की हम सदा करते रहें,
मम आयु देवों के काम आए, हम नमन करते रहें।
हे इन्द्र !मम कल्याण को , कल्याण का पोषण करें,
हे विश्व वेदाः पूषा श्रीमय ज्ञान संवर्धन करें।
हे बृहस्पति ! अरिष्ट नेमिः स्वस्ति कारक आप हैं,
सब त्रिविध ताप हों शांत जग के, देते जो संताप हैं।

वैयक्तिक औज़ार
» रचनाकारों की सूची
» हज़ारों प्रशंसक...

गद्य कोश

कविता कोश में खोज करें

दशमलव / ललित कुमार
(परियोजना सम्बंधी सूचनाएँ)

» हिन्दी में अनुवाद

» विभाग

» उपभाषाएँ और बोलियाँ

» अन्य भाषाएँ

» प्रादेशिक कविता कोश

» अन्य महत्त्वपूर्ण पन्नें