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मुरधर जीव जड़ी / ओम पुरोहित कागद

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रेत रो बिगसाव
थार रो हेत
उतरै
कण-कण में
परोटै धोरी
काटे जूण
साम्है
पुरखां री आण ।

मुरधर जीव जड़ी