भारतीय साहित्य के विशालतम ऑनलाइन संग्रहालय से कुछ आंकड़े (...और गिनती जारी है!)
कविता कोश: 57000+ कुल पन्नें; 2,000+ रचनाकार; 25,000+ कविताएँ; 10,000+ ग़ज़लें; 3,000+ गीत/नवगीत; 1,500+ नज़्में | 125,000+ आगंतुक/माह; 20,000,00+ रचना-पठन/माह
गद्य कोश: 7,000+ कुल पन्नें; 500+ रचनाकार; 1,500+ कहानियाँ; 600+ लघुकथाएँ; 100+ उपन्यास; 600+ आलेख; 300+ निबंध; | 20,000+ आगंतुक/माह; 1,000,00+ रचना-पठन/माह
© कॉपीराइट योगदानकर्ता कविता कोश टीम

मृत्यु-दर्शन / महेन्द्र भटनागर

Kavita Kosh से
Pratishtha (वार्ता | योगदान)ने किया हुवा 01:43, 6 अप्रैल 2011का अवतरण

(अंतर) ← पुराना संस्करण | वर्तमान संशोधन (अंतर) | नया संशोधन → (अंतर)
यहां जाएं: भ्रमण, खोज

मृत्यु:

सुनिश्चित है जब;

व्यर्थ इस क़दर

क्यों होते हो

आशंकित,

आतंकित !


मृत्यु से अरे कह दो —

‘जब चाहे आना; आये।’


इस समयावधि तो

आओ,

मिल कर नाचें-गाएँ !

नाना वाद्य बजाएँ !

तोड़ें मौन;

मृत्यु की चिन्ता

करता है कौन ?

वैयक्तिक औज़ार
» रचनाकारों की सूची

गद्य कोश

» हिन्दी में अनुवाद

» विभाग

» भाषाएँ और भी

» महत्त्वपूर्ण संदेश
  • फ़िलहाल नए आवेदन स्वीकार नहीं किए जा रहे हैं। कृपया अपनी रचनाएँ कोश में जोड़ने के लिए अभी आवेदन न करें। आगे की सूचना इसी जगह प्रकाशित की जाएगी।
  • कविता कोश से संबंधित हर जानकारी पाने के लिए पढ़ें: कविता कोश: हिन्दी काव्य में जुड़ता एक नया आयाम

» प्रादेशिक कविता कोश

» अन्य महत्त्वपूर्ण पन्नें

» अन्य पन्नें