भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

मैंने मापा ख़ुद को / अदोनिस

Kavita Kosh से
Anupama Pathak (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 19:16, 20 दिसम्बर 2017 का अवतरण

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

मैंने मापा ख़ुद को अपने ख़यालों की स्त्री से
बाहर निकला उसकी तलाश में
मगर कुछ भी न मिला जिससे मिल सके उसका कोई सुराग --
कोई पुल नहीं था
मेरी देह और मेरे ख़्वाब के बीच

इस तरह मैं रहने लगा अपने ख़यालों में
इस तरह दोस्त बन गए मैं और फ़रेब


अँग्रेज़ी से अनुवाद : मनोज पटेल