भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

मैं खड़ी थी / आन्ना कमिएन्स्का

Kavita Kosh से
अनिल जनविजय (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 01:15, 28 अगस्त 2013 का अवतरण ('{{KKGlobal}} {{KKAnooditRachna |रचनाकार=आन्ना कमिएन्स्का |संग्रह= }} [[Categor...' के साथ नया पन्ना बनाया)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

मुखपृष्ठ  » रचनाकारों की सूची  » रचनाकार: आन्ना कमिएन्स्का  » मैं खड़ी थी

 
मैं खड़ी थी अपनी बहन के साथ क़ब्र के नज़दीक
और हम ज़रूरी चीज़ें की बाबत बातें कर रहे थे।
बेटा ठीक-ठाक कर रहा है स्कूल में । सबसे छोटा अभी से बकबक करने लगा है ।
अगर आप लोगों के प्रति नीचता न करें, वे भले बने रहते हैं आपके वास्ते ।
अपार्टमेंट को नया-नया रंगा गया है । हमने एक मेज़ और कुछ कुर्सियां ख़रीदी हैं ।
कभी-कभार कोई पड़ोसी ठहरकर कहता है बढिय़ा दीखता है आपका घर ।
माँ का इस कदर पसंदीदा पौधा लद गया है फूलों से ।
मैं फूल लाना चाहती थी पर मुझे डर था वे मुरझा जाएँगे ।
हम बातें करते रहते हैं और हवा, पेड़, पत्थर और धरती सारे के सारे सुनते रहते हैं ।
और जिस के वास्ते हम लाए थे ये ख़बरें, वह नहीं सुन सकती ।
हो सकता है वह हमारे पीछे खड़ी जिन्दगी के पचड़ों पर मुस्करा रही है
और फुसफुसा रही है मुझे मालूम है प्यारी बच्चियों, अब और कुछ बताने की ज़रूरत नहीं मुझे ।

अँग्रेज़ी से अनुवाद : अशोक कुमार पाण्डे